
पालघर। आर्वी पंचायत समिति की समूह विकास अधिकारी सुनीता मरसकोल्हे को मनरेगा योजना में कथित गबन प्रकरण के मामले में की गई गिरफ्तारी के विरोध में पालघर जिला परिषद के अधिकारियों ने महाराष्ट्र विकास सेवा राजपत्रित अधिकारी संघ के नेतृत्व में दो दिवसीय कामबंद आंदोलन शुरू कर दिया है। इस आंदोलन में अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविंद्र शिंदे, परियोजना संचालक डॉ. रूपाली सातपुते, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (साप्रवि) इजाज अहमद शरीक मसलत, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (पंचायत) अशोक पाटिल, उपमुख्य कार्यकारी अधिकारी (मनरेगा) अतुल पारसकर सहित सभी समूह विकास अधिकारी और सहायक समूह विकास अधिकारी शामिल हुए हैं।
कामबंद आंदोलन के चलते जिले में मनरेगा, घरकुल योजना एवं मुख्यमंत्री समृद्ध पंचायत राज अभियान सहित विभिन्न विकास कार्यों पर प्रभाव पड़ा है और ऑनलाइन मंजूरी प्रक्रियाएँ पूरी तरह ठप हो गई हैं। अधिकारी संघ ने आरोप लगाया है कि मनरेगा प्रकरण में एक संविदा कर्मचारी की गवाही और कुछ लेन-देन में इस्तेमाल हुए डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट्स को आधार बनाकर बिना प्राथमिक प्रशासनिक जांच एवं वरिष्ठ अधिकारियों की अनुमति के सुनीता मरसकोल्हे की गिरफ्तारी की गई, जो अनुचित है। संघ का कहना है कि डेटा एंट्री, मैपिंग और आधार लिंकिंग जैसे कार्य संविदा कर्मचारियों द्वारा किए जाते हैं, जबकि अंतिम चरण में केवल तकनीकी रूप से अधिकारी के डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग होता है। इसलिए सिर्फ इसी आधार पर अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं है। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि महिला अधिकारी होने के बावजूद गिरफ्तारी के दौरान आवश्यक कानूनी और प्रक्रियागत सावधानी नहीं बरती गई।
आंदोलन का समर्थन करते हुए अधिकारियों ने अपने डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट मुख्य कार्यकारी अधिकारी मनोज रानडे के पास जमा कर दिए, और स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा ठोस निर्णय लिए जाने तक कोई भी ऑनलाइन प्रशासनिक कार्य नहीं किया जाएगा। फिलहाल 4 और 5 दिसंबर को कामबंद आंदोलन जारी रहेगा। यदि मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो संघ ने 6 दिसंबर से पूरे महाराष्ट्र में अनिश्चितकालीन कामबंद आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
